Thursday, December 1, 2022
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मधुमेह के प्राकृतिक एवं घेरलू और आयुर्वेदिक उपचार।

मधुमेह के प्राकृतिक एवं घेरलू और आयुर्वेदिक उपचार – Diabetes ka gharelu upchar

आज मधुमेह (Diabetes) नामक बीमारी एक महामारी का रूप लेती जा रही है यह बीमारी शरीर में हुए असुंतलन के कारण होता हैं यह असुंतलन इंसुलिन नामक तत्व की शरीर में कमी के कारण पैदा होता है उस दशा में मनुष्य भोजन के साथ जो शक्कर खाता है वह पच नहीं पाता, यकृत खराब होने के कारण पेशाब के साथ चीनी भी बाहर निकल जाती है चक्कर शरीर को ऊर्जा देती है लेकिन बजाय ताकत कीजिए उधर से निकले शरीर से बाहर निकल जाती है मधुमेह के रोगी को प्यास और भूख अधिक लगती है पेशाब बार-बार आता है संक्रमण रोगों के बचाव की ताकत कम हो जाती है घाव भरने में करने में काफी समय लगता है आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कम हो जाती है।

मधुमेह के प्राकृतिक एवं घरेलू उपचार

  • पहला मेथी के दाने 10 ग्राम और 10 ग्राम सूखा करेला अच्छी तरह पीसकर चूर्ण बनाकर खाएं
  • दूसरा कच्चे केले के टुकड़े करके उसे सुखा लें फिर बनाकर शीशी में भर लें एक चम्मच गाय के दूध के साथ सेवन करें
  • ताजे आंवले का दो चम्मच शहद के साथ दिन में 2 बार सेवन करें
  • मधुमेह में यदि बार-बार पेशाब लगे तो उसे दूर करने के लिए एक चम्मच पिसी हुई हल्दी को फ़ाक कर पानी पिए
  • आम की 8 से 10 नई पत्तियों को चबाकर खाने से मधुमेह पर नियंत्रण हो जाता है
  • जामुन के 8 से 10 फलों को एक कप पानी में उबालें, फिर पानी को ठंडा करके उसी जामुन में मैथ ले और सुबह शाम पिए इससे शुगर की मात्रा को कम करती है
  • दोपहर के समय मूली का रस मधुमेह के रोगियों के लिए रामबाण औषधि है
  • जामुन के 4-5 पत्तों को सुबह के समय थोड़े से सेंधा नमक के साथ चबाकर खाने से कुछ दिनों में ही मधुमेह कम हो जाता है
  • गुड़मार के पत्तों को सुखाकर इसका चूर्ण बना लें तैयार चूर्ण में से दो 2 ग्राम तुलसी के दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करें

मधुमेह के आयुर्वेदिक उपचार

बेल की सूखी पत्तियों 50 घीक्वार 50 ग्राम गुड़मार 50 ग्राम जामुन की गुठली 50 ग्राम करेले की पत्तियां 50 ग्राम सब को कूटकर पीसकर चूर्ण बना लें इसमें से 10 ग्राम चूर्ण प्रतिदिन फीके दूध के साथ साथ सेवन करें।

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